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Chahat ke Veeraan Saagar Mein (Hindi)

Overview

Publisher
Prowess Publishing
Released
November 22, 2019
ISBN
9789389097795
Format
ePub
Category
Poetry

Book Details

चाहत वो नशा है जिसमें डूबने वाला न तो खुलकर हंस पाता हैना ही जी भरकर रो पाता है। ये वो तड़प है जिसके बिना जीनेमें भी मज़ा नहीं और मरने में भी सुकून नहीं। इस सागर मेंडूबकर मुझे जो भी मिला उसका एक मामूली सा हिस्सा अपनीइन कविताओं में ज़ाहिर करने की कोशिश की है। काश....इस दर्दकी या तो कोई दवा हो या फिर ये दर्द बेइंतेहा हो......

Author Description

मेरी प्रेरणा, पापा की पहली ग़ज़ल, जो बचपन मे उनसे सुनी थी:"किसी की जुस्तजू में इस कदर भटका किए बरसों,कि अपने आप से मिलने को हम तड़पा किए बरसों!गुलों की चाह में काँटों से खेला किए बरसों,हंसी की चाह में गमों को झेला किए बरसों!!खुशी की हमने तो वो कीमत चुकाई है,ज़रा से मुस्कुराए थे, कि रोया किए बरसों......"

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